वाटर प्रुफ

हलफ़नामा शिखर कभी- कभी लगता है मेरी आँखे वाटर प्रुफ है तभी तो बाहर का पानी बाहर और भीतर की आर्द्रता हमेशा भीतर गलती सडती है..... सचमुच वाटरप्रुफ चीजो के अन्दर पानी ही नही धूप का भी निषेध होता है तभी तो भीतर की चीजे सूख नही पाती बल्कि सीलन समाते समाते भरभराने... [पूरी पोस्ट]
writer प्रभात रंजन
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[26 May 2008 12:10 PM]

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