जिसका गुन हरचरना गाता है....
मिथिलेश कुमार सिंह आइए...भारतीय राजनीति के मछली बाजार में...मैं आपका स्वागत करता हूं...हिचकिए मत...चले आइए...अगर आप शरीफ हैं...इस बाजार से आपका पहले वास्ता नहीं पड़ा है...तो नाक पर रूमाल रख लीजिए...सड़ांध है यहां...आप गश खाकर गिर सकते हैं...मुझे आदत...
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प्रभात रंजन
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[24 Jul 2008 09:52 AM]



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