मौतें और ख़बर
आज रह रह कर किसी कि कही हुई दो पंक्तियाँ जेहन में आ रही है :- इंसानियत का तकाज़ा किताबों में पढ़ा था आज किसी की मौत भी ख़बर बन गई है...
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शोभित जैन
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[27 Nov 2008 09:05 AM]



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