स्कूल की मस्ती

Wajood जब हम उदास या अकेले होते हैं तो यादों की टॉर्च लेकर बचपन के गलियारों में खो जाने को दिल करता है एक बार उनही गलियारों में भटकते- भटकते और जगजीत सिंह जी की ग़ज़ल "वो कागज़ की कश्ती " गुनगुनाते हुए स्वतः ही हाथ चल पड़े और तुकबंदी हो गई अगर मेरी यह छोटी स... [पूरी पोस्ट]
writer शोभित जैन
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[16 Feb 2009 05:07 AM]

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