दो शेर चुराए हुए
कल शाम को पिछले कुछ महीने की जमा-पूंजी पर एक बार फिर से हमला हुआ, और एक बार फिर से मेरी तनख्वा अप्रत्याशित खर्चे की भेंट चढ़ गई और मेरे हाथ में रह गया मुझे मुहँ चिढाता हुआ "Zero Balance", तब मुझे मजबूर होकर हिन्दी फ़िल्म से ये शेर चुराना पड़ा (भावनाओं...
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शोभित जैन
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[23 Dec 2008 08:01 AM]



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