विकासवाद के विरुद्ध
प्रणाम करने की मुद्रा में वे इतना झुके की देखते ही देखतेगायब होने लगीरीढ की हड्डीपार्श्व में उभरने लगी एक दुमवक्त बेवक्तमालिकों के आगे हिलाने के लियेकान फैलकर लंबे हो गयेसिर्फ चुगली सुनने के लियेनाखून पैने हो गयेहाथ पंजों में बदल गयेपर अजीब बातकी कटो...
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sanjeev persai
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[09 Jul 2008 06:06 AM]



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