pungibaaj
पढ़ाई और बरसात जब भी मेरे मन में पढ़ाई के विचार आते थे जाने क्यों आकाश में काले बादल छा जाते थेमेरे थोड़ा-सा पढ़ते ही गगन मगन हो जाता थापंख फैला नाचते मयूर मैं थककर सो जाता थापाठयपुस्तक की पंक्तियाँ लोरियाँ मुझे सुनाती थींछनन छनन छन छन बारिश की बूँदे...
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sanjeev persai
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[31 Jul 2008 03:24 AM]



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