माँ
मैंने तुम्हारी बांहों के पालने में सोते हुए सपने देखे हैं और पांवों के हिंडोले पर झूलते हुए दुनिया देखी है। जब तुम मेरी बांहों में मनके और गले में चाँद सूरज जड़े-गंडे ताबीज डालती थी, तब मुझे यह कहाँ पता था की तुम्हारा जीवन भी ऐसे ही सूत्रों से बंधा है...
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sanjeev persai
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[08 May 2009 08:05 AM]



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