ये कैसा मातम है ?
मुंबई ने कई आतंकी हमले झेले है लेकिन मुम्बईकरों का जूनून कभी ख़त्म नही होता। हर हमाले के बाद मुंबई और मजबूत होकर उभरती है। जब इस घटना से द्रवित हुआ तो एक कविता बन पडी पेश कर रहा हूँ ... ये कैसा मातम है... खामोश हुई जुबां, दिल उदास बीमार हौसले, उम्मीद...
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Abhay
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[28 Nov 2008 12:31 PM]



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