शराफत
शराफत इंसानों की कैसी ये शराफत है झूठ की नींव पे खड़ी सच की इमारत है जेब में है खून से सने खंजर औ' जुबां पे इबादत है ...............
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Abhay
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[14 Aug 2009 09:29 AM]



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