गीत
आज एक गीत और साथ में सूर्य ग्रहण की फोटो प्रस्तुत है. गीत धूप से संवाद करना आ गया है. उम्र भर सच को सराहा सच कहा. झूठ का हर वार सीने पर सहा. क्या डरायेंगे हिरनकश्यप हमें, स्वयं को प्रह्लाद करना आ गया है. धूल वाले रास्ते हक़ के सबब. राजमार्गों से करेंग...
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संजीव गौतम
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[31 Jul 2009 23:59 PM]



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