गली दूर तक खामोश है.

मेरा कमरा गली में आज सन्नाटा है, ना ही कोई आहट ना ही कोई शोर, मेरी हाथ की घड़ी में शाम अभी बस ढली ही है, फिर गली इतनी गुमसुम क्यों मिसेज गिल भी अपनी कुर्सी डाले नही मिली बच्चों का शोर, किलकारियां, आज क्या हुआ है यहाँ लड़कियों की चहलकदमी और उनके लिए नुक्कड़ पर... [पूरी पोस्ट]
writer Manuj Mehta

mumbai

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[01 Nov 2008 01:44 AM]

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