यानी मैं
सिंदबाद के समुद्री डाकुओं और मुनाफाखोर मनुष्यताओं के रक्तपाती इतिहास के सदियों पुराने जर्जर पृष्ठों से छिटक कर इक्कीसवीं सदी की बिलासी वैचारिकता में नख-दंत की तरह धंसा हुआ मैं एक अनवरत इनकार हूं- सृष्टि का आदि अव्यय जिसे नष्ट करने के अभियानों का इतिह...
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कपिलदेव
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[06 May 2009 10:43 AM]



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