इस देश के हालात से बापू उदास हैं
दंगे औ फसादात से बापू उदास हैं, इस देश के हालात से बापू उदास हैं । सपनों की जगह आंख में है मौत का मंजर, हिंसक हुए जजबात से बापू उदास हैं । बढते ही जा रहे हैं अंधेरों के हौसले, जुल्मों की लंबी रात से बापू उदास हैं । बंदूक बोलती है कहीं तोप बोलती, हिंस...
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dr. ashok priyaranjan
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[02 Oct 2008 16:22 PM]



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