उर्दू की जमीन से फूटी हिंदी गजल की काव्य धारा
डॉ. अशोक प्रियरंजन मेरठ प्रिय नितिन, कल एक साप्ताहिक पत्र में तुम्हारा एक गीत और एक गजल पढऩे को मिली । गीत मुझे बेहद अच्छा लगा लेकिन गजल नाम से जो पंक्तियां तुमने लिखी हैं, वे गजल के मिजाज से कोसों दूर लगीं । मुझे तुम्हारी रचनात्मक यात्रा से खासा लगा...
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dr. ashok priyaranjan
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[30 Nov 2008 14:33 PM]



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