ये कैसी राष्ट्रीय आपदा है ?

चार पहर कभी-कभी ज़िंदगी से मौत बेहतर लगने लगती है. ये वो स्थिति है जब कुछ नहीं सूझता. कोई रास्ता नज़र नहीं आता. सब कुछ बर्बाद होते देखने के बाद जीने की इच्छा ख़त्म होने लगती है. उड़ीसा में साइक्लोन के बाद ज़िंदा बचे लोगों की कहानियां ऐसी ही थीं. तमिलनाडु में... [पूरी पोस्ट]
writer amit kumar
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[02 Sep 2008 13:23 PM]

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