ना ही मोरा गइंठी में एको रूपैया.....

चार पहर हे जगदम्बा,..तू ही अवलम्बा,..तू ही मोरी भक्ति की सुधि लेवैया,...न ही कोई हित,..न ही परतीत,..न ही मोरा गइंठी में एको रूपैया....ये एक गीत है. नदियों को देवी समझ पूजने वाली बिहार की महिलाएं बाढ़ की इस विपदा में इसे गा रही हैं. अपनों की जान सलामत रखने के... [पूरी पोस्ट]
writer amit kumar
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[03 Sep 2008 13:39 PM]

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