इस बर्बादी के किरदार ?
हंसने-मुस्कुराने पर वक्त पाबंदी नहीं लगाता,..इसके मौक़े हर जगह हैं. पर कहीं-कहीं चाह कर भी आप हंस नहीं सकते,..विश्वास नहीं होता....तो कोसी के प्रलय से पीड़ित लोगों के पास पहुंचिए...चारों तरफ दर्द ही दर्द. दर्द बहुत गहरा है इसलिए चीख भी ऊंची है. पानी...
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amit kumar
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[07 Sep 2008 12:26 PM]



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