ये ख़बर थी कुछ अलग...
ये ख़बर थी कुछ अलग,.. हर नज़र ठहर गई रात से सुबह हुई,....शाम यूं ही ढल गई फिर अल्लसुबह से रात तक .. कुछ नहीं बदल सका धुएं की धुंध बीच का मंज़र रहा दबा-दबा.. इस शहर की बानगी...अबके गांव तक पहुंच गई ये ख़बर थी कुछ अलग,.. हर नज़र ठहर गई यूं जो छोड़ के च...
[पूरी पोस्ट]
amit kumar
7
0
0
0
0
[01 Dec 2008 06:10 AM]



Shuffle








