... मेरो दर्द न जाने कोय. एक बेचारे पुरूष की दर्द भरी आह, मगर सुनेगा कौन?
लोग अक्सर महसूस करते हैं, और गाहे बगाहे थोड़ी हिम्मत जुटाकर शिकायत भी कर ही लेते हैं कि ब्लॉग जगत में किसी भी मुद्दे पर सहानुभूति का रुख महिलाओं की और कुछ ज्यादा ही झुका हुआ नजर आता है. बेचारे पुरुषों को अपनी बात ठीक से रखने का मौका ही नहीं मिलता. बस...
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Ghost Buster
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[21 Sep 2008 22:02 PM]



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