फिर कुछ कहना है
आज फिर कहने को कुछ है, इसलिए लंबे समय के बाद कुछ लिखने बैठा हूं। पिछले दिनों कई लोगों से मुलाकात हुई, कई लोगों से बात हुई। हर आदमी अपने आप में असंतुष्ट दिखा और थोड़ा दुखी भी। आखिर क्यों? कई दिनों तक चुपचाप सोचता रहा। आखिर आदमी खुश क्यों नहीं है। जिसे...
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Sanjay Sinha
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[28 Mar 2007 10:26 AM]



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