कर्त्तव्य

प्रेरणा ईश्वरचन्द्र विद्यासागर कलकत्ता के बड़ा बाजार से होकर गुजर रहे थे कि रास्ते में उन्हें 14-15 वर्ष की आयु का एक लड़का मिला । नंगे पैर, फटे-पुराने कपडे और बुझा-सा चेहरा उस की हालात बताने के लिए पर्याप्त थे । उसने ईश्वरचंद्र विद्यासागर से गिड़गिड़ाते हुए कहा... [पूरी पोस्ट]
writer दिनेश शर्मा
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[13 Aug 2009 22:09 PM]

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