हँसते हँसते
हँसते-हँसते’ में बैठना ‘फँसते-फँसते’ बन गया....”
‘हँसते-हँसते’ जैसा नाम...व कलाकारों में राजपाल यादव। हास्य-विनोद का अन्दाज़ हुआ था। और यही सबसे बडे धोखे निकले। न फिल्म में कुछ हँसते-हँसते होता, न एक बार भी हँसी आती। हँसाने के नाम पर बाप-बेटे-चाच की त...
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satyadev tripathi
सिनमा
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[02 Jun 2008 02:12 AM]



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