एक सफर
घर की इकलौती चिमनी... डगमगाती थी। रसोई के बचे तेल से, कितना जल पाती थी? बस्ती में बसा, कोने का वो मकान... रोशनी की परिभाषा, यही चिमनी जताती थी। और घर से बाहर, कहीं दूर... तेज़ धूप चिलिचलाती थी। घर के सारे उलझे काम, लौ के दम तोड़ने से पहले, करने हैं प...
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तरूश्री शर्मा
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[03 May 2008 03:40 AM]



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