मेरा विश्वास

तपती रेत आस का बादल उड़ता उड़ता, मुझ तक ही तो आएगा। रात की पंछी धुंधला धुंधला, होकर के खो जाएगा। लम्बे डग हैं,छोटा मग है, अभी पार हो जाएगा। रहते रहते हवा का साया, अपने पंख फैलाएगा.... कुहरा यूं छंट जाएगा, रोशन एक ख्याल आएगा। तभी आस का छूटा बादल, उड़कर मेरे पा... [पूरी पोस्ट]
writer तरूश्री शर्मा
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[10 May 2008 08:39 AM]

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