यही है ना वो भूख?

तपती रेत दिल्ली की ठंडी शाम थी और महज चार घंटे बाद ट्रेन। मैं, मेरी बहिन और उसकी फ्रेंड सहित हम चार लोग थे और करोल बाग के बाजार में शॉपिंग के बाद एक और दोस्त को साथ लेकर किसी रेस्टोरेंट में खाना खाना था। इसके बाद राजेन्द्र प्लेस की एक होटल से अपना सामान उठाकर... [पूरी पोस्ट]
writer तरूश्री शर्मा
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[29 Jan 2009 00:22 AM]

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