क्या होगा?

तपती रेत नए साल में नया क्या होगा... वोही रात वोही दिन.. वही तुम और वही मैं। झुटपुटे से निकलता चांद, साथ के छिट-पुट तारे, पर कौन हमारे... छिटकी सी धूप, अलसा के खोया रूप, कैसा प्रतिरूप... रात की आसमानी आंच, इर्द गिर्द लहराता सा बोझ, किसकी सोच.... दीमक सा दिखता... [पूरी पोस्ट]
writer तरूश्री शर्मा
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[29 Jan 2009 00:15 AM]

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