मैनें आहुति बनकर देखा..

मैनें आहुति बनकर देखा.. सबसे पहले अमृता तुम .... " जब तक आंखों में कोई हसीं तसव्वुर कायम रहता है, और उस तसव्वुर की राह में जो कुछ भी ग़लत है उसके लिए रोष कायम रहता है, तब तक इंसान का सोलहवां साल भी कायम रहता है। हसीं तसव्वुर चाहे महबूब के मुंह का हो चाहे धरती के मुंह का, इस... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[21 Oct 2008 18:42 PM]

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