जीवन खुशियों का ताना तो संघर्षों का बाना है......

मैनें आहुति बनकर देखा.. प्रिय मित्रों , आज अपनी एक ऐसी कृति पोस्ट कर रहा हूँ , जो मेरे दिल के बेहद करीब है । बचपन गाँव में गुजारने के बाद मैं शहर में रहा तो ज़रूर , लेकिन दिल से गाँव की कसक आज भी नहीं छूट पाई है । कभी दुनिया भर के स्वार्थ और दोस्ती के लिबास में छुपी मक्कारी... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[05 Nov 2008 12:03 PM]

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