छपते छपते.......

मैनें आहुति बनकर देखा.. बहुतों से सुन चुके होंगे, लीजिये हम भी कहे देते हैं...... शुभ दीपावली असल में कल इस नामुराद कॉलेज की कैद से कुछ दिनों के लिए मुक्ति मिल जायेगी, अतः सम्भावना कम ही है कि कल चलते-चलते कोई पोस्ट कर पाऊँ। और अगर कर भी पाया तो क्या पता कब तक छपे. खैर मेरी... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[04 Nov 2008 12:03 PM]

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