तन्हाई के राजदार.....1

मैनें आहुति बनकर देखा.. मैनें एक साल लखनऊ में गुजारा है। ये नही कहूँगा कि आईआईटी की तैयारी की है , अन्यथा कई लोगों की ओर से कई सवाल उठ खड़े होंगे। उसी एक साल में मुझे एक बड़ी बुरी लत लगी - डायरी लिखने की। आदत लखनऊ छोड़ने के साथ ही छूट गई थी। लेकिन बीते दिनों वह डायरी हाथ लगी... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[04 Nov 2008 11:14 AM]

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