फिर वही कुंज-ओ-कफस,फिर वही सय्याद का घर !

मैनें आहुति बनकर देखा.. तन्हाई के राजदार... 2 8 दिन , गाँव का पुरसुकून माहौल , माँ - बाप - भाई - बहन सहित संयुक्त परिवार के रिश्तों की गर्माहट और ... फिर वही कुंज - ओ - कफस , फिर वही सय्याद का घर ! दीपावली का उल्लास छू हो चुका है। घर से लौटने के बाद हॉस्टल के कमरे का ताला ख... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
views
6
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[04 Nov 2008 11:53 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix