तनहाई के राजदार...3

मैनें आहुति बनकर देखा.. मैं आज एक मुक्त - कविता सूत्र प्रारम्भ कर रहा हूँ । यह सात - आठ बेतरतीब अ तुकबंदियों - गद्य काव्यों की एक श्रृंखला है ... जिसकी एक - एक लड़ी मैं वक़्त - बेवक्त पोस्ट करता रहूँगा । और हाँ जाहिर है , ये भी मेरी डायरी के पन्ने हुआ करते थे । इसलिए इसे डायर... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[07 Nov 2008 11:31 AM]

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