क्रोध भारतीय जनमानस का स्थाई भाव है, नपुंसकता राजनेताओं का

मैनें आहुति बनकर देखा.. वक्त रहते शोक जता लिया जाय तो अच्छा है। क्या पता नई घटना कब हो जाए! मैं इसे एडिट कर क्रोध करना चाहता था, लेकिन सोचा कि फायदा कुछ नहीं। क्रोध जनता की मानसिकता का स्थाई भाव हो चुका है, और नपुंसकता राजनेताओं का। मुझे याद है, वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हमला ह... [पूरी पोस्ट]
writer कार्तिकेय मिश्र (Kartikeya Mishra)
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[29 Nov 2008 08:06 AM]

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