सिर्फ एक बार....

तेरे नाम........यही तो है। जानवर* ~* ~* ~* ~* ~* तेरे होठों की हंसी बनने का ख्वाब है, तेरे आगोश मे सिमट जाने का ख्वाब है, तु लाख बचाले दामन इश्क़ के हाथों, आंसमां बनके तुझ पर छा जाने का ख्वाब है, आजमाईश यु तो अच्छी नहीं होती इश्क़ की, तु चाहे तो तेरी तकदीर बनाने क ख्वाब है, वो म... [पूरी पोस्ट]
writer गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
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[20 Feb 2009 07:59 AM]

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