तुम्हारे बिना ये भी तो...........

तेरे नाम........यही तो है। जानवर *~*~*~*~*~*~* दिल जलेगा तो जमाने में उजाला होगा, हुस्न जर्रों का सितारों से निराला होगा. कौन जाने ये मुहब्बत कि सज़ा है की सिला, हम “साहिल" पर पहुँचे तो किनारा ना मिला. बुझ गया चाँद किसी दर्द भरे दिल की तरह, रात का रंग अभी और भी काला होगा, देखना... [पूरी पोस्ट]
writer गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
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[18 Jul 2009 05:08 AM]

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