जब भी टुटेगा......

तेरे नाम........यही तो है। जानवर*~*~*~*~*~*~* रोना भी जो चाहें तो वो रोने नहीं देता, वो शख्स तो पलकें भी भिगोने नहीं देता... वो रोज रुलाता है हमें ख्वाब में आकर, सोना भी जो चाहें तो वो सोने नहीं देता..... ये किस के इशारे पर उमड़ आये है बादल, है कौन जो बारिश कभी होने नहीं देता..... [पूरी पोस्ट]
writer गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
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[23 Jul 2009 09:53 AM]

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