इस तरह तो किसी को........
जानवर*~*~*~*~*~*~* टुटा हुआ शीशा फिर जोड़ा नहीं जाता आँख से निकला हुआ आँसू फिर वापस नहीं आता तुम तो कह कर भुल चुके हो सब कुछ लेकिन मुझसे वो पल भुलाया नहीं जाता तेरी मोहब्बत ने जंजीरे डाली है ऐसी कि छुड़ाना भी चाहुँ तो छुड़ाया नहीं जाता महफिल में भी मुझ...
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गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
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[28 Jul 2009 09:32 AM]



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