तेरे नाम........यही तो है।
अभी ना जाओ की तारों का दिल धडकता है, तमाम रात पडी है, जरा ठहर जाओ॥ ****************************गोविन्द K....
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गोविन्द K. प्रजापत "काका" बानसी
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[28 Jul 2009 09:59 AM]



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