नव वर्ष
इक और नया अवसर आया ख़ुशियों के पुष्प खिलाने का अंतस् की सब कटुता तजकर अपनों को गले लगाने का मन में जागे उल्लास नया जीवन में हो मधुमास नया उलझे-सुलझे संबंधों में फिर से पनपे विश्वास नया मुस्कानों की कलियाँ चटकें हर दिल में निस्पृह प्रीत उठे पावनता नयन...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[27 Mar 2009 13:04 PM]



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