माँ मैंने अक्सर देखा है
माँ मैंने अक्सर देखा है तुमको कोरें गीलीं करते चौके में ही खड़ी-खड़ी तुम चुपके-चुपके रो लेती हो जब चकले पर एक चपाती बेलन से बिलने लगती है ऑंसू की दो बूंदें टप-टप छलक-छलक कर गिर पड़ती हैं चकले वाली गोल चपाती गरम तवे पर चढ़ जाती है फिर थोड़ा सा आटा लेक...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[28 Mar 2009 13:29 PM]



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