गुमनामी
कुछ ज़र्द से पत्ते थे जो सज कर सँवर गए कुछ फूल जंगलों में ही खिल कर बिखर गए कुछ छाछ की छछिया लिए दुनिया पे छा गए कुछ खीर हाथ में लिए घुट-घुट के मर गए...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[31 Mar 2009 01:34 AM]



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