नमक
यूँ चखा हमने बहुत दुनिया के स्वादों का नमक है ज़माने से अलग, माँ की मुरादों का नमक तू परिन्दा है तेरी परवाज़ ना दम तोड़ दे लग गया ग़र शाहज़ादों के लबादों का नमक आँसुओं की शक्ल ले लेंगी तड़प और सिसकियाँ दिल के छालों पर जो गिर जाएगा यादों का नमक दावतें...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[01 Apr 2009 22:46 PM]



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