अगर-मगर से बचा

KAVYANCHAL चलो किसी तरह मैं मुश्क़िले-सफ़र से बचा ख़ुदा मुझे तू अब गुमान के असर से बचा इन आइनों के सामने से ज़रा बच के निकल तू अपने आप को ख़ुद अपनी भी नज़र से बचा अगर इस आग को बढ़ने से रोकना चाहे तो अपने मुल्क को इस आग की ख़बर से बचा ये दुनिया हर किसी पे उंगलिय... [पूरी पोस्ट]
writer चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[05 Apr 2009 03:40 AM]

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