अहिंसा
बारुदों के ढेर पर दुनिया खड़ी है देखो ज़ख्मों का एक ही इलाज है अहिंसा धाँय-धाँय, धड़-धड़, धूम-धूम की ध्वनि में वीणा के सुरों-सा एक साज है अहिंसा तोप-टैंक-बम-परमाणुओं की कुंडली में साढ़ेसाती जैसी एक गाज है अहिंसा ऐरों-गैरों-नत्थूखैरों कायरों का काम नह...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[07 Apr 2009 00:05 AM]



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