महावीर वन्दना
त्रिशला के लाल तेरा कैसा है कमाल नहीं तन पे रुमाल फिर भी तू महाराज है जीत लिया काल काट कर्मों का जाल नोच दिए सब बाल तेरे वीरता के काज हैं तप का धमाल तेरे त्याग का धमाल तेरी सधी हुई चाल तेरा दुनिया पे राज है धरती निहाल, तो पे आसमां निहाल सारी जगती निह...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[07 Apr 2009 00:11 AM]



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