मेरी राहों पे चलकर देख लेना
मेरी आँखों का मंज़र देख लेना फिर इक पल को समंदर देख लेना सफ़र की मुश्क़िलें रोकेंगी लेकिन पलटकर इक दफ़ा घर देख लेना किसी को बेवफ़ा कहने से पहले ज़रा मेरा मुक़द्दर देख लेना बहुत तेज़ी से बदलेगा ज़माना कभी दो पल ठहरकर देख लेना हमेशा को ज़ुदा होने के पल...
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चिराग जैन CHIRAG JAIN
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[28 May 2009 04:30 AM]



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