हफ्ते का ब्यौरा
साँझ ढलते ही घर की ओर रुख करते हैं हम , मौका मिले तो कुछ इधर उधर तांक - झांक करते है हम कभी इस मॉल में कभी उस स्टोर पे रुकते है हम जेबे हलकी होती हैं शामो को ही । मन मचलता हैं चाट की दुकानों पर पिज्जा - बर्गर देख मुँह में पानी आता हैं जाम छलकाने को ज...
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सुमित ठाकुर
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[21 Jul 2008 15:21 PM]



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