संकोच
कैसे कहे तुमसे मन में कितने अरमान हैं , होठो पर ताला लगा कर दबाये रखते हैं, पास तुम बैठी रहती हों पर मन से दूरी से बनाये रखते हैं । वक्त गुजरता हैं बड़ी मुश्किल से हमारा , पर खैर अब इसकी आदत सी हो गई हैं , तुमसे कुछ न कह पाने की कमजोरी, अब हमारी बेबसी...
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सुमित ठाकुर
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[16 Sep 2008 16:14 PM]



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