विडंबना - २

कुछ तुम कहो कुछ हम कहे पिछले दिनों कुछ आवश्यक कार्य से मुझे इलाहाबाद जाना पड़ा , वहा पर रात को देरी से पहुँचने की वजह से मुझे कुछ घंटे प्लेटफोर्म पर ही बिताने पड़े , इस पोस्ट को मैने डायरी में तो वही बैठे-बैठे ही लिखा किंतु आपके समक्ष अब प्रस्तुत कर रहा हूँ । रात्रि के करीब... [पूरी पोस्ट]
writer सुमित ठाकुर
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[06 Oct 2008 16:11 PM]

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